सोशल मीडिया पर उठी पीएम मोदी से पुतिन के नक्शे क़दम पर चलने की मांग(An article in BBC quoting me) 27th Feb 2022

https://www.bbc.com/hindi/social-60531590

यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से भारतीय सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है. जहां एक ओर कुछ सोशल मीडिया यूज़र इस हमले की निंदा करते हुए हिंसा ख़त्म करने की अपील कर रहे हैं.

वहीं, कुछ लोग पुतिन की तारीफ़ करते हुए पीएम मोदी से उनके कदमों पर चलने की मांग कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर ऐसी कई टिप्पणियां की गयी हैं जिनमें भारत से विवादित क्षेत्रों जैसे पाक प्रशासित कश्मीर और अक्साई चिन को पाकिस्तान और चीन से “वापस लेने” की मांग की जा रही है.

कुछ टिप्पणियों में रूस के हमले को अखंड रूस की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है. इसके साथ ही अखंड भारत की मांग उठाई जा रही है और साथ में नक्शे भी शेयर किए जा रहे हैं.

अखंड भारत से आशय उस क्षेत्र से है, जो अगर होता तो, उसमें पाकिस्तान और चीन के साथ विवादित क्षेत्रों के साथ-साथ भारत के कई पड़ोसी देश शामिल होते.

बीजेपी और आरएसएस के सदस्यों की ओर से इससे पहले भी ये मांग उठाई जाती रही है.

इस ट्रेंड को ट्विटर से लेकर फ़ेसबुक पर देखा जा सकता है. ट्विटर पर कई यूज़र वैरिफाइड अकाउंट्स के साथ इस मांग को उठा रहे हैं. और फ़ेसबुक पर बड़े समूहों में इस पर चर्चा देखी जा रही है जिनमें दस लाख के क़रीब सदस्य हैं.

ऐसी ही एक पोस्ट बीजेपी नेता और अंबेडकरनगर से पूर्व सांसद हरिओम पांडेय ने अपने 80 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर वाले वैरिफाइड अकाउंट से की है.छोड़िए Twitter पोस्ट,

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इसी तरह बीजेपी के आईटी सेल से जुड़े शिवराज सिंह दाबी 30 हज़ार से ज़्यादा फॉलोअर वाले अपने वैरिफाइड अकाउंट से लिखते हैं, “राष्ट्रपति पुतिन ने बताया है कि किस तरह से एक बार फिर अखंड रूस बन सकता है… हमें भी अखंड भारत की उम्मीद नहीं खोनी चाहिए.”छोड़िए Twitter पोस्ट,

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एक पोस्ट लेखक भावना अरोड़ा ने अपने 1,69,000 फॉलोअर वाले वैरिफाइड अकाउंट से किया, “चूंकि हमें अब ये पता चल गया है कि नेटो और यूएन की क्षमता क्या है तो अब समय आ गया है कि हम पीओके को वापस ले लें.”छोड़िए Twitter पोस्ट,

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तमिलनाडु के एक पत्रकार ने लिखा है, “अब पीओके हासिल करने के लिए हमारे पास एक टेंप्लेट है.”छोड़िए Twitter पोस्ट, 4https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?creatorScreenName=bbchindi&dnt=false&embedId=twitter-widget-

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अन्य टिप्पणियों में लिखा गया है, लोहा गरम है, मार दो हथौड़ा…

इसके अतिरिक्त ऐसे ही कई बयान मीम के साथ शेयर किए गए हैं.छोड़िए Twitter पोस्ट,

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निंदा करने से बचता हुआ भारत

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ेंपॉडकास्टविवेचना

नई रिलीज़ हुई फ़िल्मों की समीक्षा करता साप्ताहिक कार्यक्रम

एपिसोड्स

समाप्त

पीएम मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन के साथ फ़ोन पर हुई बातचीत में हिंसा रोकने और बातचीत एवं कूटनीति पर ज़ोर देने की अपील की है. भारत ने यूक्रेन की स्थिति पर ख़ेद तो व्यक्त किया है लेकिन अब तक रूसी हमले की निंदा करने से बचने की कोशिश की है.

साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर हुए हमले की निंदा तो की लेकिन वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, यानी न तो उसने यूक्रेन और न ही रूस के पक्ष में वोट दिया.

लेकिन बात अगर सोशल मीडिया पर उठी मांग की करें तो यूक्रेन पर रूसी हमले की तुलना चीन और पाकिस्तान से विवादित क्षेत्रों को वापस लेने से करना काफ़ी जोखिम भरा है. सबसे बड़ा जोखिम ये है कि जहां यूक्रेन ने 1990 में अपने परमाणु हथियार त्याग दिए थे, वहीं चीन और पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं.

इससे पहले भारतीय नेताओं, जिनमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अक्साई चिन को भारत का अभिन्न अंग बता चुके हैं.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही पूरे कश्मीर पर दावा करते हैं और दोनों देश इसके हिस्सों को नियंत्रित करते हैं, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के रूप में जाने जाते हैं.

भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर अब तक दो युद्ध और एक सीमित संघर्ष में भाग लिया है.

अक्साई चिन लद्दाख के पूर्व में स्थित एक पठार है जिस पर चीन का नियंत्रण है लेकिन भारत इस पर दावा करता है. ये इलाका चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि ये हिस्सा चीन के शिनजियांग प्रांत को पश्चिमी तिब्बत से जोड़ता है.छोड़िए YouTube पोस्ट, 1https://www.youtube.com/embed/A06w1IpPe_w?feature=oembedवीडियो कैप्शनचेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

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क्या दोनों स्थितियों की तुलना की जा सकती है?

जानकार कहते हैं कि यूक्रेन पर रूस के हमले से भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद की तुलना करना सही नहीं होगा. दोनों क्षेत्रों के बीच कोई तुलना ही नहीं है.

रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ कहते हैं कि इन दो क्षेत्रों की बीच कोई तुलना नहीं की जा सकती. इसका अहम कारण ये है कि, “रूस ने यूक्रेन पर हमले के पीछे सुरक्षा को अपनी प्राथमिक चिंता का कारण बताया है, जबकि भारत के लिए ऐसी कोई सुरक्षा चिंता फ़िलहाल नहीं है. परमाणु शक्ति, सैन्य शक्ति और इलाक़े में अंतर जैसे पहलुओं में भी काफ़ी अंतर है. आप पीओके या अक्साई चीन में टैकों की गड़गड़ाहट नहीं देखना चाहेंगे.”

“सबसे अहम बात ये है कि भारत सरकार की नीति आक्रामक होने के बजाय विकास से ज़्यादा जुड़ी हुई है.”

पुतिन के साथ फ़ोन पर हुई बातचीत में पीएम मोदी ने यूक्रेन में हिंसा को ख़त्म करने की अपील करते हुए बातचीत और कूटनीति पर ज़ोर दिया. भारत ने यूक्रेन की दशा पर दुख भले ही जताया है लेकिन अब तक हमले के लिए रूस की आलोचना नहीं की है.

इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट किया, “इस सरकार की कूटनीतिक ग़लतियां काफ़ी भारी पड़ेंगी.” हालांकि उन्होंने इसके बारे में और कुछ नहीं कहा, बस पाकिस्तान, चीन और रूस में हुई गतिविधियों से जुड़ी सुर्ख़ियां साझा की हैं.छोड़िए Twitter पोस्ट,

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Maj Gen Harsha Kakkar

Retired Major General Indian Army

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